Sunday, April 11, 2010

फितरत

टूटे सपने बुनना फितरत थी हमारी,
पर उन खामोश पलों ने सब सिखा दिया
सोंचा था चलेंगे कभी गम की राहों में,
पर उस एक नज़र ने सरे गमो को मिटा दिया,
थी मंजिल थी राहें फिर भी निकल पड़े हम ,
क्या करें उस एक नज़र ने दीवाना जो बना दिया

मासूम सा दिल.......

मासूम सा दिल है,
हर पल ये धडकता है।
दिमाग की बातों का इस पर ,
कोई जोर नहीं चलता है।
हर धड़कन से एक मासूम सी आवाज़ आती है।
पर जाने क्यों वक़्त की धार और सोंच के वार से,
वो आवाज़ कुछ धीमी पड़ जाती है।

Thursday, April 1, 2010

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी क्या है ?
ख़ुशी की तलाश या गम का दर्पण।
जीत का इतिहास या मुश्किलों से सम्बन्ध।
फूलों की फुहार या कांटो की चुभन।
बचपन की शरारत या मंजिल की ललक
अपनों का प्यार या खुद से संघर्ष
अतीत की पुकार या भविष्य का स्वप्न।
यादों की पुकार या कर्मो की मिशाल
क्या है आखिर ,
प्रश्नों का जवाब या जवाब में भी प्रश्नों की कतार!