ज़िन्दगी क्या है ?
ख़ुशी की तलाश या गम का दर्पण।
जीत का इतिहास या मुश्किलों से सम्बन्ध।
फूलों की फुहार या कांटो की चुभन।
बचपन की शरारत या मंजिल की ललक ।
अपनों का प्यार या खुद से संघर्ष ।
अतीत की पुकार या भविष्य का स्वप्न।
यादों की पुकार या कर्मो की मिशाल ।
क्या है आखिर ,
प्रश्नों का जवाब या जवाब में भी प्रश्नों की कतार!
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ReplyDeleteजिंदिगी को प्रसंचीन्हा क्यूं बनाया तुमने,
ReplyDeleteखुसी को तलासो जरुर, पर गम को दर्पण क्यूं बनाया तुमने
मिस्किले तो आयेगी ही जंग जितने में, पर जित को इतिहास क्यूं बनाया तुमने
बचपन की सरारते तो ठीक है, पर मंजिल की ललक को नेगेटिव क्यूं बनाया तुमने
भविष्वा का स्वप्ना तो सभी देखते है, अतीत की पकर क्यूं लगायी तुमने
प्रशन का जबाब क्यूं चाहते हो तुम
जिन्दगी जीना चाहते हो या उत्तरों में डूबना चाहते हो तुम
जिन्दगी सवालो की दरिया नहीं मेरे दोस्त
बल्कि इस दरिया में तैरने वाली नईया है
इन सवालो को खेवना तो परेगा ही, नहीं तो नईया चलगी कैसे
अपनी पतवार संभल खेवैये और चलता चला चल.........
very true feelings..
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