एक रत्न जीवन का ........
Tuesday, January 29, 2019
Saturday, May 6, 2017
मेरा देश.........
नक्सलियों द्वारा देश के बेटे मारे जाते है।
खुदगर्ज़ है वो लोग जो भीतर से आघात करते है ,
देश पर जान देने वाले बेटो को जाने कैसे बदनाम करते है।
लोकतंत्र है जी वो ये कारनामा भी खुले आम करते है ,
सारे अधिकार है इनके , पर कर्तव्यों का इन्हे ज्ञान नहीं।
अब तो लाचारी लगती है, इन्हे बर्दाश्त किये जा रहे है ,
हर गलत के साथ खड़ा है एक , उसे ख़ास किये जा रहे है।
वक़्त आ गया है इन्हे औकात बता दो ,
इनको हमारे देश की साख बता दो।
बदतमीजी अब माफ़ न करेंगे ,
दोगले चेहरे अब बर्दाश्त न करेंगे।
या तो इस देश को मन से अपनाइये ,
वार्ना यंहा से चले जाइये।
Tuesday, May 24, 2016
ज़िन्दगी क्याहै ?
ज़िन्दगी क्याहै ?
ख़ुशी की तलाश या गम का दर्पण ,
जीत का इतिहास या मुश्किलों से सम्बन्ध ,
फूलों की फुहार या काँटों की चुभन ,
बचपन की शरारत या मंज़िल की ललक ,
अपनों का प्यार या खुद से संघर्ष,
अतीत की पुकार या भविष्य का स्वप्न ,
यादो की पुकार या कर्म की मिशाल ,
क्या है आखिर ,
प्रश्नों का जवाब या जवाब में भी प्रश्नों की कतार ?
ख़ुशी की तलाश या गम का दर्पण ,
जीत का इतिहास या मुश्किलों से सम्बन्ध ,
फूलों की फुहार या काँटों की चुभन ,
बचपन की शरारत या मंज़िल की ललक ,
अपनों का प्यार या खुद से संघर्ष,
अतीत की पुकार या भविष्य का स्वप्न ,
यादो की पुकार या कर्म की मिशाल ,
क्या है आखिर ,
प्रश्नों का जवाब या जवाब में भी प्रश्नों की कतार ?
Wednesday, May 18, 2016
खुला आसमान
ऊँची उड़ान लगानी है ,
थकने की हमें परवाह नहीं ,
ज़ंजीरो ने हमे रोका है ,
पिंजरे के हम पंछी नहीं ,
आसमान कर रहा इंतज़ार मेरा,
खुल कर पंख फैलाना है।
Wednesday, March 2, 2016
व्याकुल मन
कही आरक्षण की आग है , तो कही देश विरोधी ललकार है,
कही दरिंदगी फैली समाज में, तो कोई आत्महत्या को लाचार है,
पर न जाने कैसे, राजनीती का हर जगह प्रसार है।
प्रश्न बस इतना सा,क्यों व्याकुल हो उठता हूँ ,
इन समाचार प्रसारणों से सिहर उठता हूँ ।
क्या इन स्तिथियों से केवल व्याकुल होते जायेंगे,
या अपने समाज के लिए हम भी कुछ कदम उठाएंगे।
कही दरिंदगी फैली समाज में, तो कोई आत्महत्या को लाचार है,
पर न जाने कैसे, राजनीती का हर जगह प्रसार है।
प्रश्न बस इतना सा,क्यों व्याकुल हो उठता हूँ ,
इन समाचार प्रसारणों से सिहर उठता हूँ ।
क्या इन स्तिथियों से केवल व्याकुल होते जायेंगे,
या अपने समाज के लिए हम भी कुछ कदम उठाएंगे।
Friday, April 17, 2015
बोनस.......
अप्रैल का महीना है , बोनस को लुभाते है,
चंद बूंदो से अपनी तृष्णा बुझाते है ,
हर साल पानी की ये बौछार आती है सूखे के बाद,
पर बौछारें कंहा अकाल मिटा पाती है,
जरा प्यास तो बढ़ा , न ऐसे तू उसे दबा ,
ये प्यास ही तो तुझे तेरी मज़िल तक पहुचायेगी ,
वरना ज़िन्दगी है, वो तो यु ही बीत जाएगी।
चंद बूंदो से अपनी तृष्णा बुझाते है ,
हर साल पानी की ये बौछार आती है सूखे के बाद,
पर बौछारें कंहा अकाल मिटा पाती है,
जरा प्यास तो बढ़ा , न ऐसे तू उसे दबा ,
ये प्यास ही तो तुझे तेरी मज़िल तक पहुचायेगी ,
वरना ज़िन्दगी है, वो तो यु ही बीत जाएगी।
Wednesday, February 19, 2014
मोहब्बत
जो देखुँ उनको , तो उदासी भाग जाती है ,
जो रूठे वो हमसे, बेचैनी साथ लाती है ,
हुस्ने इश्क़ ने यू दीवाना किया हमको ,
कि मुस्कुराये वो , और हमारी जान जाती है।
न रूठो तुम हमसे , न यु खफा होना,
आदतें है बिगड़ी , पर मोहब्बत पाक है मेरी।
जो रूठे वो हमसे, बेचैनी साथ लाती है ,
हुस्ने इश्क़ ने यू दीवाना किया हमको ,
कि मुस्कुराये वो , और हमारी जान जाती है।
न रूठो तुम हमसे , न यु खफा होना,
आदतें है बिगड़ी , पर मोहब्बत पाक है मेरी।
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