नक्सलियों द्वारा देश के बेटे मारे जाते है।
खुदगर्ज़ है वो लोग जो भीतर से आघात करते है ,
देश पर जान देने वाले बेटो को जाने कैसे बदनाम करते है।
लोकतंत्र है जी वो ये कारनामा भी खुले आम करते है ,
सारे अधिकार है इनके , पर कर्तव्यों का इन्हे ज्ञान नहीं।
अब तो लाचारी लगती है, इन्हे बर्दाश्त किये जा रहे है ,
हर गलत के साथ खड़ा है एक , उसे ख़ास किये जा रहे है।
वक़्त आ गया है इन्हे औकात बता दो ,
इनको हमारे देश की साख बता दो।
बदतमीजी अब माफ़ न करेंगे ,
दोगले चेहरे अब बर्दाश्त न करेंगे।
या तो इस देश को मन से अपनाइये ,
वार्ना यंहा से चले जाइये।
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