खामोश पलों ने मुझसे कुछ सवाल पुछा ,
हँसता था जिन पलों में उनका हिसाब पुछा।
थोडा हिचकिचाया , थोडा सकुचाया,
पर उन पलों का हिसाब न लगा पाया।
किसी पल में वो बात न थी,
किसी लम्हे कि सौगात न थी।
मन ही मौजी था , सदा मुस्कुराता था ,
गम में भी खुशिया वो लुटाता था।
पर अब न जाने कैसा हिसाब करते हैं,
हंसने के लिए भी कारणो कि बात करते हैं।
हँसता था जिन पलों में उनका हिसाब पुछा।
थोडा हिचकिचाया , थोडा सकुचाया,
पर उन पलों का हिसाब न लगा पाया।
किसी पल में वो बात न थी,
किसी लम्हे कि सौगात न थी।
मन ही मौजी था , सदा मुस्कुराता था ,
गम में भी खुशिया वो लुटाता था।
पर अब न जाने कैसा हिसाब करते हैं,
हंसने के लिए भी कारणो कि बात करते हैं।
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